Waterlogging in Hathras due to heavy rains

बारिश बीच सड़क पर चलते वाहन
– फोटो : संवाद

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हाथरस में 20 फरवरी शाम बादलों की गरज के साथ तेज बारिश शुरू हो गई। कई मोहल्लों में जलभराव हो गया और इससे सब कुछ अस्त व्यस्त हो गया। लोग बारिश में भीगते हुए घर पहुंचे। बारिश से किसानों की चिंता बढ़ गई। 

शाम लगभग सवा सात बजे बारिश शुरू हुई और रुक-रुक बारिश होती रही। शहर के मुख्य बाजार पंजाबी मार्केट, रामलीला मैदान, सासनी गेट, खाती खाना सहित गणेश गंज, बाग मूला चौराहा, चामण गेट, किला गेट आदि तमाम मोहल्ले जलमग्न हो गए। इस दौरान जलभराव में दुपहिया वाहन भी बंद हो गए, जिन्हें खींचकर ले जाते लोग दिखाई दिए। एक बार  फिर से जल निकासी व्यवस्था की पोल खुलती दिखाई दी। शाम के समय घरों से खरीदारी के लिए बाजार निकले लोग फंस गए।

जलभराव

आलू और सरसों की फसल खराब होने की आशंका

जोरदार बारिश से आलू और सरसो की फसल खराब होने की आशंका है। हालांकि गेहूं की फसल को इस बारिश लाभदायक है। इस बार हाथरस में करीब 51 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू  और 16 हजार हेक्टेयर में सरसों है। सरसों की फसल खेतों में कटी पड़ी है तो कुछ पकी खड़ी है। आलू की फसल तैयार है और खोदाई की तैयारी है। जलभराव से उसकी गुणवत्ता प्रभावित होगी और जलभराव लंबे समय तक रहता है तो आलू गल सकता है। 

मंडी में सरसों

मंडी में पड़ी सरसों भीगी

सरसों की अगेती फसल की निकासी हो चुकी है। किसानों ने अपनी उपज बेचने के लिए मंडी भेज दी है। नमी को सुखाने के लिए सरसों को मंडी में खुले में रख दिया गया है। अचानक हुई बारिश से यह सरसों भीग गई। इससे गुणवत्ता प्रभावित होने की सूरत में किसानों को उपज का वाजिब भाव नहीं मिलेगा।

आलू की खोदाई की तैयारी कर रहा था। बारिश से खोदाई लेट हो जाएगी। इस बारिश से आलू की गुणवत्ता भी प्रभावित होगी। सरसों की फसल को भी नुकसान होगा।-वीरेंद्र सिंह, गढ़ी जैनी, किसान।

इस समय बारिश से आलू की फसल को नुकसान होगा। बारिश से आलू की गुणवत्ता प्रभावित हो जाएगी। खेत में पानी भरने की स्थिति में आलू के सड़ने तक की संभावना बन जाएगी।- हरेंद्र सिंह, झींगुरा, किसान।

बारिश से आलू और सरसों की फसल को नुकसान होगा। आलू की गुणवत्ता प्रभावित हो जाएगी। खेत में पानी भरने में आलू के सड़ने की आशंका है। सरसों के दाने काले पडने की संभावना है। गेंहू की फसल को बारिश से फायदा होगा। गेंहू को प्राकृतिक नाइट्रोजन मिल जाएगा। इससे पौधों की वृद्धि अच्छी होगी।-डॉ. एके सिंह, कृषि वैज्ञानिक, हाथरस।



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