Election History: In the first election, ballot boxes were made of 20 gauge metal

पहले चुनाव में मतपेटियां जुटाना भी बड़ी चुनौती थी।
– फोटो : अमर उजाला

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देश में 1951—52 में लोकतंत्र के लिए हुए पहले चुनाव में मतपेटियों की जरूरत पड़ी और उनकी डिजाइन को तय करना एक बड़ा कार्य था। लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनावों के लिए मतपेटियों के मानक चुनाव आयोग ने काफी विचार विमर्श के बाद तय किए थे। मतपेटियों में लॉकिंग सिस्टम, मतपत्र डालने के लिए स्थान और मतपेटियों की संख्या आदि के लिए निर्णय लिए गए थे।  

1951-52 के चुनाव में देश में 1 लाख 32 हजार 560 मतदान केन्द्रों पर 1 लाख 96 हजार 84 बूथों पर चुनाव होना थे। इतनी संख्या में मतदान केंद्रों पर मतपेटियां और वे भी अलग-अलग राजनैतिक दलों के लिए भिन्न भिन्न चाहिए थी। चूंकि, उस वक्त देश में साक्षरता प्रतिशत बहुत कम था, इसलिए चुनाव चिन्ह देख कर वोटरों को अपना मत मतपेटी में डालना था। चुनाव आयोग ने यह मानक तय किया था कि मतपेटी 20 गेज लोहे के पतरे की निर्मित होनी चाहिए।  

गोदरेज समेत कई कंपनियों को दिया ठेका

जब चुनाव आयोग ने मतपेटियों के सब मानक तय कर दिए तो मतपेटियों की आपूर्ति के लिए टेंडर जारी किए गए। देश की कई स्टील कंपनियों के टेंडर स्वीकृत हुए, उनमें प्रमुख गोदरेज बॉयज मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी बॉम्बे ने पांच रुपये, हैदराबाद की अल्विन मेटल वर्क्स लिमिटेड ने 4 रुपये 15 आने, बुंगो स्टील फर्नीचर लिमिटेड ने 4 रुपये 6 आने, ओरिएंटल मेटल प्रेसिंग वर्क्स लि. ने 4 रुपये 15 आने, उत्तर प्रदेश राज्य सरकार ने करीब 13 विभिन्न उत्पादकों को 5 रुपये 1 आने में ठेका दिया था। सबसे महंगा ठेका कलिंगा रेफ्रीजरेशन लि. कटक और ग्वालियर इंजीनियरिंग वर्क्स का 6 रुपये से कुछ अधिक में आपूर्ति का था।  

मद्रास में मजबूरी में लकड़ी की पेटियां भी लेनी पड़ीं

समय पर आपूर्ति नहीं होने के कारण मद्रास राज्य को स्टील के बजाय लकड़ी की 1 लाख 11 हजार 95 मतपेटियां लेनी पड़ी थीं। यह भी देश में एकमात्र राज्य था, जहां लकड़ी की मतपेटियां उपयोग की गई थीं। देश में लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनाव के लिए 25 लाख 84 हजार 945 मतपेटियां क्रय की थीं, जिसकी लागत 1 करोड़ 22 लाख 87 हजार 349 रुपये रही थी।  

इसलिए रंगवाई थी अलग-अलग रंगों में

चूंकि देश में पहले चुनाव के वक्त लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ होना थे, इसलिए लोकसभा और राज्य विधानसभा के लिए मतपेटियां भी अलग-अलग में रंग करवाया गया था ताकि मतदाता को रंग पहचानने में परेशानी न हो। लोकसभा चुनाव की मतपेटियां का रंग हल्का हरा, या गहरा हरे रंग की पेटियां थीं। 

किस कंपनी ने कितनी मतपेटियां बनाईं

पहले आम चुनाव के वक्त देश में मतपेटियों की सर्वाधिक आपूर्ति गोदरेज कंपनी ने 12 लाख 84 हजार 369, हैदराबाद अल्विन मेटल वर्क्स ने 3 लाख 80 हजार 507, बंगो स्टील कटक ने 2 लाख 52 हजार 124, ओरिएंट मेटल वर्क ने 65 हजार, उत्तरप्रदेश द्वारा विभिन्न उत्पादकों से 4 लाख 91 हजार 850 और मद्रास राज्य के लिए लकड़ी की 1 लाख 11 हजार 95 मतपेटियां पहले चुनाव में की थी।  

यूपी में लगी थी पांच लाख से ज्यादा पेटियां

सर्वाधिक मतपेटियां उत्तर प्रदेश में 5 लाख 44 हजार 800, मद्रास राज्य में 3 लाख 6 हजार 754, पश्चिम बंगाल में 2 लाख 89 हजार 170 बिहार में 2 लाख 60 हजार 390 उपयोग की गई थी, शेष अन्य राज्यों में, मध्य भारत में 53 हजार 16 मतपेटियां उपयोग के लिए थी।  सबसे कम मतपेटियां बिलासपुर के लिए 680 रही थी।

8165 टन स्टील लगा मतपेटियां बनाने में

इतनी अधिक संख्या में मतपेटियां बनाने के लिए पर्याप्त मात्रा में स्टील की जरूरत थी।  चुनाव आयोग ने इस्पात मंत्रालय से आग्रह कर निर्माण करने वाली कंपनियों को स्टील उपलब्ध करवाया गया था। इस तरह पहले चुनाव में निर्मित मतपेटियों में 8165.45 टन स्टील उपयोग किया गया था। इस तरह बैलट बॉक्सों की संख्या के अलावा अतिरिक्त मतपेटियां भी सुरक्षित रखी गई थी, ताकि जरूरत पड़ने पर उपलब्ध करवाई जा सके।



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