debate between both parties completed in case of Shri Krishna idol being buried in stairs of Jama Masjid Agra

कोर्ट
– फोटो : अमर उजाला।

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उत्तर प्रदेश के आगरा में लघु वाद न्यायालय में विचाराधीन योगेश्वर श्रीकृष्ण जन्म स्थान सेवा संघ ट्रस्ट बनाम जामा मस्जिद मामले में मंगलवार को वादी एवं प्रतिवादी पक्ष की ओर से बहस पूरी हो गई। वादी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह और वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश कुलश्रेष्ठ ने बहस की। 

उन्होंने कहा कि मामले में जामा मस्जिद के वक्फ एक्ट 1995 की धारा-चार के तहत आज तक सर्वे नहीं किया गया है। जबकि, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश हैं कि एक्ट में नियमानुसार कार्रवाई के बिना वक्फ की संपत्ति नहीं माना जा सकता।

दबा है श्रीकृष्ण का विग्रह

सुन्नी वक्फ बोर्ड और जामा मस्जिद दोनों ने अवैध कब्जा किया हुआ है। मस्जिद की सीढ़ियों का तमाम भाग नीचे जमीन में दबा हुआ है। इसमें श्रीकृष्ण भगवान का विग्रह दबा हुआ है। श्रीकृष्ण लला के हितों की रक्षा करना कोर्ट का दायित्व है। 

इस तारीख को आएगा आदेश

वहीं जामा मस्जिद की ओर से बहस करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता रईसउद्दीन ने कहा कि ऐतिहासिक तथ्यों के आधार के बिना काल्पनिक तथ्यों पर वाद दायर किया गया है। इसलिए वाद सुने जाने योग्य नहीं है। लघुवाद न्यायाधीश मृत्युंजय श्रीवास्तव ने दोनों तरफ की बहस सुनने के बाद 26 फरवरी की तिथि आदेश के लिए नियत कर दी है।



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