Republic Day 2024 Special pandit deenanath bhargav constitution of india ashok chinh

पंडित दीनानाथ भार्गव के पुत्र और बहू।
– फोटो : न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

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भारतीय संविधान का पहला पन्ना और राष्ट्रीय चिह्न (अशोक सिंह स्तंभ) को स्केच करने वाले स्वर्गीय पंडित दीनानाथ भार्गव के परिवार ने उनके लिए उचित सम्मान की मांग की है। उनके बेटे सौमित्र दीनानाथ भार्गव ने कहा है कि संविधान दिवस के दिन पिता को याद न किया जाए यह मुमकिन नहीं। उन्होंने देशवासियों को वह अशोक चिन्ह को दिया है जो जन्म से लेकर अंत समय तक और हर सरकारी दस्तावेज में काम आता है। 

सौमित्र ने कहा कि मेरा हमेशा सरकार और प्रशासन से निवेदन रहा है कि उनको उचित सम्मान मिले। उनके नाम पर यूनिवर्सिटी, स्टेडियम, मुख्य मार्ग बनाए जाने चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ी को उनके योगदान के बारे में पता चले। वह भी उनसे प्रेरणा ले सके। मेरी मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से भी विनती है कि मप्र में जन्मे मेरे पिता के नाम से कुछ योजनाएं बनाई जाएं या फिर उनके जन्म स्थान बैतूल में या इंदौर, भोपाल में उनकी प्रतिमाएं लगा दें। चाहें तो अयोध्या के लिए जो नई रेल चलाई है वह उनके नाम से शुरू कर दें। हमारे परिवार को लगता है कि कहीं उनका नाम इतिहास के पन्नो में दबकर न रह जाए। 

नामी चित्रकार थे भार्गव

स्वर्गीय पंडित दीनानाथ भार्गव का जन्म मुलताई (बैतूल) म.प्र. के जमीदार परिवार में हुआ था। वे भारत के प्रसिद्ध चित्रकार थे। वह राष्ट्रीय चिह्न (अशोक सिंह स्तंभ) को स्केच करने वाली टीम के सदस्य रहे और भारतीय संविधान की पांडुलिपि के पृष्ठों को तैयार करने वाले नामी चित्रकार थे। पंडित दीनानाथ भार्गव को विख्यात चित्रकार नंदलाल बोस ने संविधान के पन्ने संवारने वाले दल में चुना था। पंडित दीनानाथ भार्गव तब 20 वर्ष के थे और शांति निकेतन में फाइन आर्ट्स की पढ़ाई कर रहे थे। वह कला भवन, शांति निकेतन के कला गुरु नन्दलाल बोस के प्रिय शिष्यों में एक थे। बोस ने ही उन्हें भारतीय संविधान की पांडुलिपि पृष्ठों को डिजाइन करने वाली टीम में चुना था। दीनानाथ भार्गव के बेटे सौमित्र भार्गव ने बताया कि जब दीनानाथ भार्गव को इस डिजाइन दल में चुना गया था, उस समय वह शांति निकेतन में ललित कला में तीन साल का डिप्लोमा कर रहे थे

संविधान के प्रथम पृष्ठ के निर्माता

संविधान के निर्माण के दौरान संविधान के प्रथम पृष्ठ का भी निर्माण किया गया, जिसे अशोक स्तंभ का रूप दिया गया है। संविधान के प्रथम पृष्ठ पर बनाए गए अशोक स्तंभ की मुख्य चित्रकार की भूमिका इंदौर के प.दीनानाथ भार्गव ने निभाई थी। दीनानाथ भार्गव ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर संविधान का यह प्रथम पृष्ठ तैयार किया था। तैयार की गई इस चित्रकारी को गोल्डन स्याही से बनाया गया था। संविधान के निर्माण की जिम्मेदारी तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू  ने शांति निकेतन को दी गई थी। शांति निकेतन के कला गुरु नंदलाल बोस ने इसे बनाने की जिम्मेदारी दीनानाथ भार्गव को सौंप दी थी।

अशोक चिह्न बनाने के लिए कई बार चिड़ियाघर गए

प्रथम पृष्ठ तैयार करने को लेकर दीनानाथ भार्गव कई बार कोलकत्ता के चिड़ियाघर गए थे। जब प्रथम पृष्ठ की चित्रकारी को तैयार किया जाना था, उससे पहले भार्गव ने शेर की बनावट को समझने के लिए कई बार कोलकाता के चिड़ियाघर जाकर शेर को देखा। जिससे पेंटिंग के दौरान किसी भी तरह की कमी ना रहे। दीनानाथ भार्गव ने जब पहली पेंटिंग को तैयार किया और उसे दिल्ली भेजा था तो मुख्य पृष्ठ की कलाकृति पर ब्रश गिर जाने के कारण उसे दोबारा बनाने के निर्देश दिए गए थे, जिसके बाद दीनानाथ भार्गव ने एक बार फिर प्रथम पृष्ठ को तैयार किया था। दीनानाथ भार्गव ने प्रथम पृष्ठ के साथ-साथ संविधान के करीब 40 पृष्ठों की चित्रकारी भी की उन्होंने संविधान निर्माण के दौरान अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे एक कुशल कलाकार थे। चित्रकारी और कलाकृति में माहिर थे। उनकी मृत्यु 24 दिसंबर 2016 को उनके इंदौर स्थित गृह निवास पर हुई। 



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