Now CM House will be not in the capital but in Ujjain also

कुलसचिव हादस उज्जैन।
– फोटो : Amar Ujala Digital

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भोपाल ही नहीं अब उज्जैन में भी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का सीएम हाउस होगा। यह खबर पढ़कर शायद आप चौंक गए होंगे, लेकिन यह बात पूरी तरह सही है। कोठी रोड स्थित विक्रम विश्वविद्यालय के कुलसचिव के बंगले पर इन दिनों रंगरोगन के साथ ही ऐसी सभी व्यवस्थाएं जुटाई जा रही हैं, जिससे कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव न सिर्फ कुलसचिव के इस बंगले पर रात्रि विश्राम कर सकेंगे, बल्कि यहां से प्रशासनिक कार्यों को भी आसानी से निपटा सकेंगे। 

कोठी रोड स्थित विक्रम विश्वविद्यालय के मुख्य प्रशासनिक भवन के पास ही कलेक्टर बंगले के सामने कुलसचिव के बंगले को इन दिनों सजाने-संवारने का काम किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस बंगले में उज्जैन प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने ऑफिस कार्य के साथ विश्राम भी कर सकें ऐसी कुछ व्यवस्थाए भी बंगले में की जा रही हैं। 

इसीलिए किया गया कुलसचिव के बंगले का चयन

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को जेड प्लस की सुरक्षा प्राप्त है। इसीलिए कुलसचिव के बंगले का चयन उज्जैन में सीएम हाउस के लिए किया गया है। बताया जाता है कि कुलसचिव का यह बंगला सुरक्षा की दृष्टि से इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस बंगले के आसपास प्रशासनिक संकुल भवन नजदीक होने के साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालय और आवास भी नजदीक है, जिससे यहां सुरक्षा के वैसे ही व्यापक इंतजाम रहते हैं। याद रहे कि यह पहला अवसर होगा जब कोई मुख्यमंत्री विश्वविद्यालय के बंगले का उपयोग अपने कार्यालय और विश्राम के रूप में कर रहा है।

बंगले की सफाई और साज सज्जा का काम जारी

विक्रम विश्वविद्यालय के कुलसचिव निवास को अब सीएम हाउस का रूप दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के लिए बंगले को सजाने संवारने का काम लगातार जारी है। यहां पर अब मुख्यमंत्री कार्यालय और सीएम के विश्राम की व्यवस्था रहेगी। विभिन्न विभागों के कर्मचारी बंगले की सफाई और साज-सज्जा में जुटे हुए हैं। जिनका कहना है कि मुख्यमंत्री जल्द ही इस बंगले में रात्रि विश्राम कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने तोड़ा था उज्जैन में रात गुजारने का मिथक

याद रहे की डॉ. मोहन यादव वही मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने उज्जैन में किसी जनप्रतिनिधि के रात गुजारने का मिथक तोड़ा है। पूर्व में यह कहा जाता था कि पद पर रहने वाला कोई भी जनप्रतिनिधि बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में रात नहीं गुजार सकता, लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस पद पर आसीन होने के बाद न सिर्फ उज्जैन में रात गुजारी बल्कि इस मिथक को भी तोड़ दिया की यहां रात गुजारने से किसी का पद चला जाता है।



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