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गोविंद मालू, मध्य में। फाइल फोटो।
– फोटो : न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

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अयोध्या Ayodhya में 22 जनवरी को राम मंदिर Ram Mandir की प्राण प्रतिष्ठा है और इससे जुड़े कई सवाल लोगों के मन में हैं। इसी तरह के कुछ सवालों पर भाजपा प्रवक्ता गोविंद मालू ने पत्रकारों से बातचीत की। इसमें उन्होंने इससे जुड़ी कई बातों को स्पष्ट किया। गोविंद मालू ने कहा कि कांग्रेस का इस कार्यक्रम में भाग न लेना चौंकाने वाला निर्णय है। अयोध्या के तौकीर अहमद कह रहे हैं कि हम नमाजी हैं और समाजी भी। बाबरी मस्जिद के पक्षकार इक़बाल अंसारी कहते हैं कि मैं अयोध्या में श्री राम का मंदिर बनने से प्रसन्न हूं। कोर्ट के निर्णय के बाद अयोध्या एकदम बदल सी गई है। इस समृद्धि के भागी हिन्दू मुसलमान सभी बनेंगे। इसके बावजूद कांग्रेस का कार्यक्रम से पीछे हटना चौंकाता है। 

वास्तविक जगह पर ही बन रहा मंदिर

मालू ने कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ बातों का गलत प्रचार किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि रामलला का मंदिर 3 कि.मी. दूर बन रहा है जबकि यह पूरी तरह से गलत है। जहां 1949 में भगवान का प्राकट्य हुआ था, 22 जनवरी को वहीं पर उन्हें विराजमान किया जा रहा है। 3 कि.मी. तो पुरानी अयोध्या की परिधि भी नहीं थी। किशोर कुणाल के नक्शे में भी इसी स्थान का उल्लेख है। मुकदमा 2.77 एकड़ जमीन के लिए चला, मंदिर और गर्भगृह वहीं पर बन रहा है। यह दुष्प्रचार सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड कर रहा है जिसे कांग्रेस भी सपोर्ट कर रही है। 

हमने रामकाज में कांग्रेस को भी शामिल किया

महंत अवैद्यनाथ राम जन्म भूमि मुक्ति यज्ञ समिति के अध्यक्ष बने। महामंत्री डा. दाउदयाल खन्ना बने जो कांग्रेस सरकार में केबिनेट मंत्री थे। विहिप के ओंकार भावे संयुक्त महामंत्री बने। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेन्द्र मिश्र कौन हैं? क्या वे मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री वरिष्ठ कांग्रेसी द्वारिकाप्रसाद मिश्र के सुपुत्र नहीं हैं? तो कांग्रेस, भाजपा और संघ पर अनर्गल आरोप क्यों लगा रही है? इस काम में हमने सभी को शामिल किया। रामकाज में जो आया वह राम का। कांग्रेस को किसने रोका था राम मंदिर बनवाने से? वह बनवा देते। 

शंकराचार्य का राजनीतिक दुरुपयोग किया जा रहा

मालू ने कहा कि कांग्रेस ही शंकराचार्य का राजनीतिक दुरुपयोग कर रही है। किसी भी शंकराचार्य ने राम मंदिर, रामलला का विरोध नहीं किया। वे अपने मठ में इस अवसर पर दीपक लगाएंगे, उत्सव मनाएंगे। कांग्रेस तो ऐसा बता रही है कि शंकराचार्य बाबरी मस्जिद के समर्थक हों, रामलला के विद्रोही हों। क्या कांग्रेस अपराध नहीं कर रही ? शंकराचार्यों का कोई विरोध नहीं है। कांग्रेस दुष्प्रचार कर रही है। श्रंगेरी पीठ और द्वारका धाम शारदा मठ के शंकराचार्य ने लिखित में और बोलकर प्राण प्रतिष्ठा को आशीर्वाद प्रदान किया है। पुरी के शंकराचार्य ने भी कहा हमारा रामजन्म भूमि को लेकर कोई विरोध नहीं है।

कांग्रेस ने पूरे भारत का अपमान किया

कांग्रेस ने श्री राम जन्म भूमि पर स्कूल, शौचालय व स्मारक बनाने का सुझाव दिया। क्या भारत सम्पूर्ण आर्यावर्त सनातन के आराध्य श्री राम के जन्म स्थान का इस तरह के सुझाव देकर उपहास नहीं उड़ाया गया? क्या कांग्रेस पार्टी ऐसे नेताओं के सुझाव को ठुकरा नहीं सकती थी? इस तरह उन्होंने पूरे भारत का अपमान किया।

कांग्रेस ने विधर्मियों के साथ संधि की

क्या कांग्रेस की विधर्मियों रामद्रोहियों के साथ संधि नहीं थी? एक फरवरी 1986 को न्यायालय के आदेश से ताला खुलता है और 6 फरवरी को बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी गठित हो जाती है। जिसके लिए एक कांग्रेसी नेता जो वकील भी हैं, पैरवी करते हैं।



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