End of five decade old bloody feud that took the lives of 25 people

सादाबाद के गांव सरौंठ में पांच दशकी दुश्मनी का अंत करने को होती बैठक
– फोटो : स्वयं

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हाथरस के सादाबाद में गांव सरौठ की पांच दशक पुरानी खूनी रंजिश, जिसमें 25 लोग मर चुके हैं। सुहाहिनों के सुहाग उजड़ गए, मां से बेटे छिन गए, बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। 14 जनवरी को दोनों पक्षों ने आपस में सुलह की और एक-दूसरे को गले लगाकर माला पहनाई। गांव में उत्सव सा माहौल था और मिठाई बांटी गईं।

उम्मेद और विजयपाल के परिवार के बीच चुनाव और गांव की राजनीति में यह रंजिश 1975 शुरू हुई थी। इन दोनों परिवारों के 12 लोग और इनसे जुड़े या एक दूसरे का साथ देने के संदेह में करीब 13 लोग जान गंवा चुके हैं। तीन परिवारों के बीच इस रंजिश में नाक की लड़ाई चल रही है। गांव में कई बार पीएसी का पहरा रहा है। पुलिस का आना-जाना तो गांव में हर समय लगा ही रहता है। डर की वजह से गांव के दर्जनों लोग पलायन भी कर चुके हैं। इससे गांव का विकास भी रुका हुआ था। 

मकर संक्रांति के मौके पर गांव मई में श्रद्धानंद महाराज की अध्यक्षता में पंचायत बुलाई गई, जिसका संचालन प्रेमवीर सिंह ने किया। दोनों पक्षों को इस पंचायत में बुलाया गया।  दोनों पक्षों के लोगों ने यह संकल्प लिया कि वह अब एक दूसरे को द्वेष भावना की नजर से नहीं भाईचारे की नजर से देखेंगे। उम्मेद सिंह और दूसरे परिवार की महिला को माला पहनाकर इस पहल का स्वागत किया गया। गांव में भी जश्न जैसा माहौल था। मिठाई बांटी गईं। समझौते से गांव के लोग खुश है। 

समझौते के लिए बुलाई गई पंचायत में पूर्व विधायक प्रताप चौधरी, एत्मादपुर विधायक धर्मपाल सिंह, जिला पंचायत सदस्य सुआ पहलवान, भाजपा प्रदेश मंत्री रूपेंद्र चौधरी, मई प्रधान रनवीर सिंह, गढ़ उमराव प्रधान राजकुमार, पूर्व प्रधान हरभजन, श्यामवीर सिंह, चंद्रपाल, श्याम सिंह, राजेश, उम्मेद पहलवान, हरिओम, सतीश आदि ने समझौते में अहम भूमिका निभाई।



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