उरई। 10 माह पहले ही कोहरा 14 लोगों की जान ले चुका है। इन सरकारी आंकड़ों के बावजूद सरकारी अफसर चेतते नजर नहीं आ रहे हैं।

शहर में ब्लैक स्पॉट चिन्हित कर औपचारिकता तो पूरी कर ली गई, लेकिन वहां कोहरे में होने वाली दुर्घटनाओं से राहगीरों को कैसे सुरक्षित करेंगे, इसके कोई इंतजाम नहीं किए गए।

जिले में अलग-अलग तहसीलों के मार्गों पर अनगिनत ब्लैक स्पॉट हैं। इनमें जो ज्यादा घातक हैं, उन पर स्थानीय प्रशासन और जिम्मेदार विभागों के अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की जा रही है। पिछले साल वर्ष 2022-23 में नवंबर-दिसंबर में नौ और जनवरी में पांच लोगों की दुर्घटना में जान चली गई थी। उसके बाद सबक लेते हुए मार्गों पर प्रशासन और विभाग को सावधानी संबंधित इंतजाम कराए जाने चाहिए थे, लेकिन पड़ताल में गंभीर ब्लैक स्पॉट पर भी ऐसी कोई कार्रवाई नजर नहीं आई।

कालपी कोतवाली क्षेत्र में झांसी-कानपुर हाईवे पर जोल्हूपुर मोड़ है। यहां जब हमीरपुर से कालपी के लिए जाने वाले वाहन या कालपी से हमीरपुर जाने वाले वाहनों को इस चौराहे को पार करना पड़ता है। इस दौरान अक्सर हादसे होते हैं। वहां सुरक्षा के कोई ऐसे मानक नहीं है। न ही साइन बोर्ड है। हमीरपुर या कालपी की ओर कोई ब्रेकर नहीं है। रिफ्लेक्टर भी नहीं हैं।

रनिया के पास बड़ा गांव तिराहे पर कानपुर-झांसी हाईवे पर उरई की ओर से आने पर वाहन जब झांसी के लिए जाएंगे और झांसी से आने वाले वाहन जब उरई की ओर जाएंगे तो इस कट को क्रॉस करेंगे। यहां कोहरे के समय खतरे से सतर्क करने के लिए न ही साइन बोर्ड है और न ही ब्रेकर। ऐसे में तेज रफ्तार वाहन हाईवे पर ऐसे ही प्रवेश कर जाते हैं। रिफ्लेक्टर व फॉग लाइट न होने के कारण हादसे हो जाते हैं।

एट थाना क्षेत्र में गिरथान पर घुमाऊदार मोड़ है। झांसी-कानपुर हाईवे पर यह मोड़ कई बार हादसे का कारण बना है। घुमाऊदार मोड़ होने की वजह से झांसी से आने वाले वाहन नहीं दिखते हैं। इसके लिए वहां ट्रैफिक मिरर होना चाहिए, जो कि नहीं है। इसके अलावा कोहरे को ध्यान में रखते हुए न साइन बोर्ड है और न ही रिफ्लेक्टर लगे हैं।

एट थाना क्षेत्र का झांसी-कानपुर हाईवे पर सोमई चौराहा है। इस चौराहे पर हादसे की कई वजह सामने आती हैं। सोमई से हरदोई गूजर आने-जाने वाले लोगों को तो हाईवे पर चल रहे वाहनों की चपेट में आने का खतरा रहता है। साथ ही सोमई से झांसी और हरदोई गूजर से कानपुर की ओर मुड़ने वालों पर भी यह ब्लैक स्पॉट काल की तरह साबित होता है। यहां पर भी खतरे का संकेत देने वाली कोई व्यवस्था नहीं है।

वर्ष 2014 की 20 दिसंबर को कोहरे के कारण कदौरा थाना क्षेत्र में ट्रक नहर में गिर गया था। इसमें छह लोगों की जान चली गई थी।

वर्ष 2022 की 31 दिसंबर को जालौन के हरदोई गूजर-नारायणपुरा मार्ग पर भंडारे का सामान लेने जा रहे युवकों की कार कोहरे के कारण नहर में गिर गई थी। इसमें दो लोगों की मौत हो गई थी, एक घायल हो गया था।

वर्ष 2016 की 25 दिसंबर को जालौन में सवारियों से भरी ऑटो में कार की टक्कर हो गई थी। इसमें चार लोगों की मौत हो गई थी। इसकी वजह भी कोहरा बना था, जिस वजह से दोनों वाहन के चालक एक दूसरं के वाहन देख नहीं पाए थे।

शहर के स्टेशन रोड निवासी राजीव पाठक ने बताया कि झांसी-कानपुर हाईवे पर कई कट ऐसे हैं, जहां अक्सर गुजरते समय डर लगता है। कई बार हादसा होने से बचा है।

शहर के बजरिया कबीर नगर निवासी कामिल ने बताया कि पिरौना पुल और एट थाना क्षेत्र के खतरनाक कट के कारण कई हादसे देखे हैं। सावधानी संबंधित जरूरी काम होने चाहिए।

गोविंदम ढाबा कट और कुसमिलिया तिराहे के खतरे को गंभीरता से नहीं ले रहे जिम्मेदार

झांसी-कानपुर हाईवे पर गोविंदम ढाबे पर बड़ी-बड़ी दुर्घटनाएं होने के बावजूद जिम्मेदारों ने सबक नहीं लिया। कोहरे का दौर शुरू होने वाला है और फिर भी ये जिम्मेदार हरकत में नहीं आ रहे हैं। विभागीय अधिकारियों और प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार है। यही हाल राठ मोहाना स्टेट हाईवे पर कुसमिलिया तिराहे का है। यहां भी कोई सावधानी संकेतक नहीं हैं। कई बड़े हादसे हो चुके हैं। जिम्मेदार कुछ करने से पहले हादसे का इंतजार करते नजर आ रहे हैं।

एआरटीओ प्रवर्तन सुरेश कुमार वर्मा का कहना है कि हाईवे व अन्य मार्गों पर खतरनाक मोड़ों पर स्पीड ब्रेकर और सावधानी बोर्डों के लिए संबंधित विभाग के अधिकारियों से बात करेंगे। जिससे इसका समाधान जल्द किया जा सके।



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