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प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों के परिणाम घोषित हो गए हैं। कुछ विधानसभा क्षेत्र ऐसे रहे हैं, जहां विजयी मतों पर नोटा भारी रहा है। यानी जितने अंतर से हार जीत हुई, उससे ज्यादा वोट नोटा ‘उक्त प्रत्याशियों में से कोई पसंद नहीं’ को मिले हैं। यदि नोटा के मत किसी दल के प्रत्याशी को मिलते तो उसकी हार जीत में बदल जाती। 

ऐसी ही एक सीट शाजापुर की है, जहां भाजपा के अरुण भीमावद ने कांग्रेस के कद्दावर नेता व पूर्व मंत्री हुकुमचंद कराड़ा को 28 मतों से पराजित किया, जबकि यहां नोटा में 1534 मत दिए गए। इसी तरह प्रदेश में शिवराजसिंह मंत्रिमंडल के मंत्री कमल पटेल हरदा में 870 मतों से हार गए परंतु वहां नोटा में 2375 मत आए। मतदाता की पसंद जब कोई उम्मीदवार नहीं होता है तो इस तरह की स्थिति बनती रहेगी।  

राइट तू रिकॉल और नोटा अब मतदाताओं के लिए असरदार उपाय है, जिसे वोटर अपनी मर्जी से इस्तेमाल कर सकता है। अब उम्मीदवारों को भी अपने प्रचार के दौरान मतदाताओं को आगाह करना होगा कि नोटा के बजाय हमें मौका दें। 

2013 से मिला नोटा का अधिकार

जो भी हो इस बार 2023 में प्रदेश में कुछ सीटों पर नोटा की अहम भूमिका रही। नोटा का प्रयोग 2013 के चुनाव से आरंभ हुआ था। यदि कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं हो तो वोटर यह बटन दबा सकता है। मप्र विधानसभा चुनाव 2013 में 1.90, वर्ष 2018 में 1.42 और 2023 में 0.98 प्रतिशत मतदाताओं ने नोटा का उपयोग किया। जाहिर है नोटा के इस्तेमाल का प्रतिशत धीरे धीरे  कम होता जा रहा है।

इन सीटों पर हार जीत में नोटा भारी

विधानसभा क्षेत्र विजयी दल  मतों से जीत  नोटा में पड़े मत 
मांधाता  भाजपा  589 1544
धरमपुरी  भाजपा  356 2455
शाजापुर  भाजपा  28 1534
गुन्नौर  भाजपा  1160 2012
सोहागपुर  भाजपा  1762 2362
भीकनगांव कांग्रेस  603 1799
राजपुर  कांग्रेस  890 1683
मनावर  कांग्रेस  708 1814
महिदपुर कांग्रेस  290 1417
सेंधवा   कांग्रेस  1677 5098
थांदला  कांग्रेस  1340 3108
गोहद  कांग्रेस  697 790
हरदा  कांग्रेस  870 2375
सेमरिया  कांग्रेस  637 1068
टिमरनी  कांग्रेस  950 2561



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