मध्य प्रदेश में भाजपा एक बार फिर सरकार बनाने जा रही है। यह रिकॉर्ड जीत है> भाजपा की यह बड़ी जीत मालवा-निमाड़ और ग्वालियर-चंबल में पार्टी की वापसी के दम पर मिलती दिख रही है। भाजपा ने जिन बड़े चेहरों को चुनाव मैदान में उतारा था, उनमें से ज्यादातर ने बड़ी बढ़त बना ली है। 




मालवा-निमाड़: बड़े उलटफेर का शिकार हुए भाजपाई मंत्री

मालवा-निमाड़ की 66 सीटों पर मंत्रियों को उलटफेर का सामना करना पड़ा। बदनावर में भाजपा से कांग्रेस में गए भंवरसिंह शेखावत ने मंत्री राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव को हराया। वहीं, बड़वानी में मंत्री प्रेम पटेल भी हारे।

इंदौर की नौ में से आठ सीटों पर भाजपा की जीत तय है। इंदौर-1 में कैलाश विजयवर्गीय और इंदौर-2 में रमेश मेंदौला ने एक-एक लाख से अधिक वोट से जीत दर्ज की। इंदौर-5 में जरूर कांग्रेस के सत्यनारायण पटेल भाजपा के महेंद्र हार्डिया के बीच कशमकश जारी है। वहीं, इंदौर विकास प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष मधु वर्मा ने जरूर पूर्व मंत्री जीतू पटवारी की चुनौती को धराशायी कर दिया।

उज्जैन की सात सीटों में से दो पर कांग्रेस की जीत हुई। पांच सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की। मंत्री मोहन यादव का मुकाबला जरूर कड़ा था। वह देर शाम तक आगे चल रहे थे। धार जिले की सात सीटों पर भी उलटफेर देखने को मिला। भाजपा से कांग्रेस में गए भंवरसिंह शेखावत ने बदनावर में मंत्री राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव को परास्त किया। वहीं, धार सीट पर नीना वर्मा ने जीत दर्ज की। अन्य पांच सीटों पर कांग्रेस को जीत मिली। 

रतलाम में पांच सीटों में से चार पर भाजपा और एक पर भारतीय आदिवासी पार्टी को जीत मिली। वहीं, मंदसौर की चार में से तीन में भाजपा और एक पर कांग्रेस को जीत मिली। नीमच की तीनों सीटें भाजपा की झोली में गई। अलीराजपुर और आगर मालवा में दो-दो सीटें हैं और इनमें से एक पर कांग्रेस और एक पर भाजपा को जीत मिली। देवास (पांच सीटें), खंडवा (चार सीटें), शाजापुर (तीन सीटें) और बुरहानपुर (दो सीटें) में तो कांग्रेस खाता भी नहीं खोल सकी। सभी सीटें भाजपा की झोली में गई। खरगोन की छह में से चार पर भाजपा और दो पर कांग्रेस ने कब्जा जमाया। झाबुआ में पांच में तीन कांग्रेस को और दो भाजपा को मिली। बड़वानी में चार में से दो-दो सीटें कांग्रेस और भाजपा की झोली में गई।

 


महाकौशल में भी शिवराज की लहर

महाकौशल में 2018 में कांग्रेस ने जबरदस्त प्रदर्शन किया था। इस बार भाजपा ने यहां वापसी की है। खासकर आदिवासी सीटों पर कब्जा जमाया है। हालांकि, मंडला की निवास सीट से भाजपा प्रत्याशी और केन्द्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते को हार का सामना करना पड़ा। इसी तरह बालाघाट में राज्य सरकार के मंत्री गौरीशंकर बिसेन और परसवाडा सीट पर राज्य मंत्री राम किशोर कांवरे को हार का सामना करना पड़ा। जबलपुर पश्चिम सीट पर पूर्व कैबिनेट मंत्री तरुण भनोत को भाजपा सांसद राकेश सिंह ने हरा दिया। नरसिंहपुर में केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल की आसान जीत हुई तो वहीं  जिले की गोटेगांव सीट से कांग्रेस प्रत्याशी और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एमपी प्रजापति को हार का सामना करना पड़ा।

नरसिंहपुर और कटनी की चार-चार सीटें और जबलपुर की आठ में से सात सीटों पर भाजपा को जीत मिली। कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा में भाजपा खाता भी नहीं खोल सकी और छह सीट कांग्रेस की झोली में गई है। मंडला में भाजपा प्रत्याशी पूर्व सांसद संपतिया उइके ने जीत हासिल की। जिले की शेष दोनों सीटें कांग्रेस को मिली। डिंडोरी में एक सीट भाजपा और एक सीट कांग्रेस को मिली। बालाघाट की छह में से चार सीटें भाजपा को मिली। सिवनी में चार में से भाजपा-कांग्रेस को दो-दो सीटें मिली।


ग्वालियर-चंबल में सिंधिया का जादू चला या कुछ और…

ग्वालियर-चंबल में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ ही नरेंद्र सिंह तोमर की प्रतिष्ठा भी दांव पर थी। महेंद्र सिंह सिसोदिया, अरविंद भदौरिया जैसे मंत्रियों की हार हुई। श्योपुर की दोनों सीटें कांग्रेस की झोली में गई, वहीं अशोकनगर में तीन में से दो सीटें भाजपा को मिली और एक कांग्रेस को। गुना में भाजपा को दो और कांग्रेस दो सीटें मिली हैं। ग्वालियर में मुकाबला बराबरी पर छूटा और कांग्रेस-भाजपा को तीन-तीन सीटें मिली हैं। दतिया की तीन में से दो सीटें कांग्रेस को और एक सीट भाजपा को मिली। यहां सबसे बड़ा उलटफेर देखने को मिला। लंबी अवधि तक प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा पीछे बने रहे। वहीं, मुरैना में तीन सीटें भाजपा को और तीन कांग्रेस को मिली हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के सामने कांग्रेस की नहीं बल्कि बसपा की चुनौती थी। काफी देर तक पीछे चलने के बाद तोमर ने रफ्तार पकड़ी और दिमनी में जीत हासिल की। शिवपुरी की पांच में से चार सीटों पर भाजपा को जीत मिली।


मध्य भारत में भाजपा की लहर

मध्य भारत को शिवराज सिंह चौहान का गढ़ माना जाता है और यहां भाजपा ने जबरदस्त प्रदर्शन किया है। हरदा में जरूर उसे झटका लगा। संजय शाह तो जीत गए लेकिन मंत्री कमल पटेल को हार का सामना करना पड़ा। बैतुल (पांच सीटें), राजगढ़ (पांच सीटें), सीहोर (चार सीटें), होशंगाबाद (चार सीटें) और विदिशा (पांच सीटें) में तो कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला। रायसेन में चार में से तीन, भोपाल की सात में से पांच सीटों पर भाजपा ने भगवा फहराया। भोपाल की दो मुस्लिमबहुल सीटों पर इस बार भी कांग्रेस के मुस्लिम प्रत्याशियों ने जीत हासिल की है। आरिफ अकील के बेटे आतिफ अकील ने भोपाल उत्तर और आरिफ मसूद ने भोपाल मध्य में जीत हासिल की।




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