MP Election 2023: Both parties have their eyes on the powerful rebels of ten seats in the state, it will be ea

बागियों पर दोनो दलों की नजर।
– फोटो : amar ujala digital

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मध्य प्रदेश की 230 सीटों में से 35 से ज्यादा सीटों पर प्रमुख दलों को बगावत का सामना करना पड़ा इन बागियों ने अपने ही पुराने दल के वोट काटे। इनमें से दस सीटों पर बागियों ने दमदारी से चुनाव लड़ा और मुकाबला रोचक कर दिया। इन बागियों को शीर्ष नेता उन्हें मनाने में नाकाम रहे है और उम्मीदवारों के प्रभाव में भी बागी नहीं आए। मतगणना से पहले उन बागियों पर दोनो दलों की निगाहेंं है।  

इस बार  ज्यादा बगावत ग्वालियर चंबल क्षेत्र में नजर आई। यहां कुछ बागियों ने सपा और बसपा से हाथ मिलाया। उनके जनाधार देख कुछ सीटों पर बसपा और सपा ने उन्हें टिकट भी दिए। यदि इस बार चुनावी परिणाम पिछले विधानसभा चुनाव जैसे होते है तो चुनाव जीतने वाले बागियों की बगिया में भी बहार होगी,हालांकि भाजपा और कांग्रेस बागियों को पार्टी से बाहर कर चुकी है, लेकिन मजबूत स्थिति वाले बागियों के संपर्क में रहने के लिए दोनो दलों के नेताअेां को जिम्मेदारी भी सौपी गई है।

पिछली बार चार निर्दलीय विधायक थे

पिछले विधानसभा चुनाव में चार निर्दलीय उम्मीदवार विधायक बने। सबसे ज्यादा तीन मालवा निमाड़ से थे। बसपा को दो और सपा को चार सीटें मिली थी। सुसनेर से कांग्रेस के बागी विक्रम सिंह राणा चुनाव जीते थे। बुरहानपुर सीट से सुरेंद्र सिंह शेरा,भगवानपुरा सीट से केदार भाई डावर,वारासिवनी से प्रदीप जायसवाल चुनाव जीते थे।

इन दस सीटों पर भाजपा और कांग्रेस को बागियों ने दी कड़ी टक्कर

– मुरैना सीट से भाजपा ने दो बार विधायक रहे पूर्व मंत्री रुस्तम सिंह का टिकट काट दिया। इससे नाराज होकर सिंह ने बसपा का दामन थामा और उनके बेटे राकेश सिंह को बसपा ने टिकट दिया। राकेश ने भाजपा उम्मीदवार रघुराज कंसाना और कांग्रेस प्रत्याशी दिनेश गुर्जर को कड़ी टक्कर दी। इस क्षेत्र में रुस्तम सिंह का प्रभाव रहा है।

-2008 के परिसीमन के बाद पन्ना जिले का हिस्सा बनी गुन्नौर सीट पर अमिता बागरी सपा के टिकट पर चुनाव लड़ी। अमिता पहले भाजपा में थी, लेकिन टिकट नहीं मिलने के बाद बगावत कर सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा। अमिता के लिए सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी चुनाव प्रचार करने आए थे।

– टीकमगढ़ विधानसभा सीट का गणित भाजपा से बगावत कर निर्दलीय खड़े पूर्व विधायक केके श्रीवास्तव ने बिगाड़ दिया। इस सीट पर मुख्य मुकाबला कांग्रेस प्रत्याशी यादवेंद्र सिंह और केके श्रीवास्तव के बीच माना जा रहा है। भाजपा उम्मीदवार राकेश गिरी गोस्वामी भी यहां के सिटिंग विधायक है, लेकिन उन्हें इस बार चुनाव में एंटी एंकमबेंसी फेक्टर का सामना करना पड़ा।

-लहार विधानसभा सीट से पूर्व भाजपा विधायक रसाल सिंह ने भाजपा और कांग्रेस उम्मीदवारों को चुनाव में कड़ी टक्कर दी। वे बसपा के टिकट कर मैदान में चुनाव लड़े। यह सीट कांग्रेस का गढ़ मानी जाती है। नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह 30 सालों से इस क्षेत्र के विधायक है। भाजपा कभी इस क्षेत्र में एकजुट होकर चुनाव नहीं लड़ी। भाजपा की तरफ से बसपा से भाजपा में आए अमरीश शर्मा चुनाव लड़े, लेकिन रसाल सिंह की बगावत ने यहां त्रिकोणीय मुकाबला बना दिया।

-बुरहानपुर सीट पर पिछले चुनाव की तरह इस बार भी त्रिकोणीय संघर्ष रहा। पिछला चुनाव कांग्रेस के बागी सुरेंद्र सिंह शेरा ने जीता था। इस बार वे कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े। इस बार इस सीट पर भाजपा के बागी हर्ष चौहान भाजपा उम्मीदवार अर्चना चिटनीस के लिए सिरदर्द साबित हुए। चौहान को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने मनाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने बगावत कर दमदारी से चुनाव लड़ा।

– धार विधानसभा सीट पर भाजपा व कांग्रेस के बागियों ने मजबूती से चुनाव लड़ा। भाजपा उम्मीदवार नीना वर्मा ने भी कांग्रेस उम्मीदवार के बजाए मुख्य प्रतिद्वंदी भाजपा के बागी राजीव यादव को माना और मंचों से उन्हें ज्यादा कोसा गया। इस सीट पर परिवर्तन, परिवारवाद के मुद्दे पर चुनाव लड़ा गया।

-इंदौर जिले की महू विधानसभा सीट पर पूर्व विधायक अंतर सिंह दरबार ने भी मुकाबला रोचक बना दिया। यहां मुख्य मुकाबला दरबार और भाजपा उम्मीदवार उषा ठाकुर के बीच माना जा रहा है। कांग्रेस के रामकिशोर शुक्ला दमदारी से चुनाव नहीं लड़ पाए। वे तीसरे क्रम पर माने जा रहे है। 

-गोटेगांव विधानसभा सीट पर टिकट बदले जाने से नाराज शेखर चौधरी बागी उम्मीदवार के रुप में मैदान में बने रहे। उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार एनपी प्रजापति को नुकसान पहुंचाया। भाजपा उम्मीदवार महेंद्र नागेश, प्रजापति और चौधरी के बीच त्रिकोणीय संघर्ष रहा।

-पेशाबकांड के बाद टिकट कटने से नाराज केदारनाथ शुक्ला ने चुनाव लड़कर भाजपा प्रत्याशी रीति पाठक के मुश्किलें पैदा की। शुक्ला के कारण भाजपा का वोटबैंक बंट गया। कांग्रेस उम्मीदवार ज्ञान सिंह को शुक्ला और पाठक से टक्कर मिली।

-आलोट सीट से पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू भी कांग्रेस उम्मीदवार मनोज चावला के लिए परेशानी का सबब बने। चुनावी मैनेजमेंट में माहिर गुड्डू ने भी दमदारी से चुनाव लड़ा है। इस सीट पर भाजपा उम्मीदवार के रुप में पूर्व सांसद चिंतामण मालवीय मैदान में थे।



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