
चेतन यादव और मोहन यादव
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
उज्जैन दक्षिण विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने यहां चेतन यादव के रूप में युवा उम्मीदवार उतारकर बाहुबली मंत्री मोहन यादव की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अपने बाहुबल और धनबल के लिए ख्यात मंत्री यादव को घर-घर दस्तक देने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
उज्जैन के मास्टर प्लान और सिंहस्थ क्षेत्र में अपने परिवार की कई एकड़ जमीन को आवासीय करवाकर विवादों में आए उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव को इस बार खुद उनकी पार्टी में ही जबरजस्त विरोध का सामना करना पड़ रहा है। सिहंस्थ क्षेत्र के लिए आरक्षित जमीन को फ्री करने के मामले में साधु संतों से लेकर जनता में हुई विपरीत प्रतिक्रिया के कारण स्वयं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को उज्जैन का मास्टर प्लान होल्ड करना पड़ा था। विरोध का आलम ये है कि बीजेपी के लगभग सभी वरिष्ठ नेता उज्जैन दक्षिण को छोड़ दूसरे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं।
यादव पर आरोप है कि उनके परिवार और आसपास के लोगों ने खनन से लेकर शराब और प्रॉपर्टी, रियल स्टेट के धंधे में अपनी मोनोपॉली कर ली है। मध्यप्रदेश की राजनीतिक संस्कृति के विपरीत यहां स्थिति ये है कि कोई भी जमीन का सौदा या खनन व्यापार मंत्री के लोगों की सहमति के बिना नहीं कर सकते। बीजेपी संगठन में नियुक्तियों और पिछले नगर निगम चुनाव में टिकट वितरण से बीजेपी के स्थानीय नेताओं में अच्छी खासी नाराजगी है।
हालांकि, मोहन यादव अपने चुनावी मैनेजमेंट में माहिर माने जाते हैं। लेकिन कांग्रेस के नए चेहरे चेतन यादव ने उनके सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। चेतन यादव का टिकट घोषित होने के बाद उत्साह में जो भीड़ उमड़ी उसने मोहन यादव के चेहरे पर चिंता की लकीरें बढ़ा दी हैं। चेतन यादव अपने परिवार की प्रतिष्ठा लगाकर शहर में अपनी पकड़ बनाने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस के साथ एक अनुकूलता ये दिख रही है कि पूर्व के चुनावों की भांति इस बार कोई बागी मैदान में सामने नहीं आया है। चेतन ने अपनी विनम्रता से पार्टी को एकजुट करने में सफलता पा ली है।
लेकिन मोहन यादव समर्थक आश्वस्त हैं कि उनके नेता का बड़ा क़द, पिछले पांच साल में किए उनके कार्य इस चुनाव में उनके पक्ष में है। एक पक्ष का मानना है कि शहर के प्रभावशाली लोगों पर यादव और बीजेपी की पकड़ जिसका फायदा उनको मिल सकता है। यादव की संघ में भी अच्छी पैठ है और संघ के कई दिग्गज नाराज मतदाताओं को साधने में कोई कसर बाकी नहीं रख रहे हैं। इन सभी के बाद भी भाजपा का गढ़ मानी जाने वाली दक्षिण विधानसभा सीट पर इस बार परिवर्तन की दस्तक दिखाई दे रही है। मोहन यादव के बाहुबल, सत्ता के प्रभाव और धनबल के सामने एक युवा चेहरे की चुनौती दिलचस्प तो है।
चेतन के चाणक्य कौन?
उज्जैन दक्षिण विधानसभा में बीजेपी के हाई प्रोफाइल और बड़े कद के उम्मीदवार का बढ़त बनाना कई राजनीतिक पंडितों को हैरान कर रहा है। कांग्रेस के चेतन यादव की सुनियोजित रणनीति के पीछे उज्जैन के वरिष्ठ नेता डॉ. बटुकशंकर जोशी और कांग्रेस से जुड़े पूर्व पत्रकार मुकेश शर्मा की मेहनत काम कर रही है। दिल्ली की राजनीति करने वाले मुकेश शर्मा का उज्जैन गृहनगर है। अपने तमाम संपर्कों का उपयोग कर शर्मा समाज, मीडिया, सोशल मीडिया और दूसरे कई फ्रंट पर चेतन यादव की रणनीति बनाने में जुटे हैं।
यादव के लिए पूरा परिवार सक्रिय
भाजपा उम्मीदवार के लिए संघ के मजबूत लॉबी के साथ ही पूरा परिवार भी लगा हुआ है। कांग्रेस उम्मीदवार की कड़ी चुनौती के बीच यादव परिवार ने मोर्चा संभाल रखा है और पार्टी के समानांतर नेटवर्क संचालित कर रहे हैं। ये लोग नाराज नेताओं को मनाने में कोई कसर बाकी नहीं रख रहे हैं और इनका दावा है कि मतदान की तारीख नजदीक आते-आते सब मैनेज हो जाएगा। कई ऐसे क्षेत्र भी हैं, जहां मोहन यादव की नाराजगी के चलते भाजपा नेता बिल्कुल सक्रिय नहीं हैं। इन क्षेत्रों में भी यादव परिवार ने मोर्चा संभाल रखा है।