राजघाट बांध निर्माण में वन विभाग की करीब 624 हेक्टेअर भूमि गई थी डूब क्षेत्र में

संवाद न्यूज एजेंसी

ललितपुर। राजघाट बांध निर्माण में वन विभाग का बहुत बड़ा भूभाग डूब क्षेत्र में गया था, इसके एवज में सिंचाई विभाग को 624 हेक्टेअर जमीन वन विभाग को प्रतिफल के रूप में देनी थी। सिंचाई विभाग ने पत्रावली में 447 हेक्टेयर भूमि हस्तांतरित भी कर दी लेकिन 177 हेक्टेयर भूमि का पेच फंसने के कारण नामांतरण नहीं किया गया। जबकि सिंचाई विभाग ने इस भूमि को वन विभाग नाम पर दर्शाकर आलाधिकारियों को रिपोर्ट भेज दी। इसको लेकर वन विभाग ने सिंचाई विभाग के आलाधिकारियों को शासन स्तर पर पत्राचार किया है।

राजघाट बांध निर्माण में वन विभाग की करीब 624 हेक्टेअर जमीन गई थी। सिंचाई विभाग ने वन विभाग को यह पूरी जमीन अभी तक नहीं दी है। जबकि बांध निर्माण को पूर्ण हुए दो दशक से अधिक का समय हो चुका है। अभी भी विभाग ने 177 हेक्टेअर भूमि हस्तांतरण नहीं की है, जबकि सिंचाई विभाग अपने दस्तावेजों में इस जमीन को वन विभाग की दर्शा रहा है। हस्तांतरण न होने के कारण वहां पर पूर्व से सिंचाई विभाग के पट्टों पर खेती करने वाले किसान काबिज हैं। ऐसे में अब यह भूमि विवाद शासन के पास पहुंचा है। साथ ही वन विभाग के अधिकारियों ने सिंचाई विभाग से भूमि का मांग की है। विभागीय सूत्रों की मानें तो 177 हेक्टेअर भूमि के हस्तांतरण को लेकर राजस्व विभाग से कानूनी अड़चन आ रही है, जिसमें पूर्व शासनस्तर पर पत्राचार भी किया गया लेकिन अभी तक शासन से भी कोई जवाब नहीं आया है। अब एक बार फिर इस भूमि को लेकर पत्राचार प्रारंभ हो गया है। यह भूमि ललितपुर तहसील के ग्राम फौजपुरा, रानीपुरा, शिवपुरा व चमरूआ में है। जिसके हस्तांतरण को लेकर पेच फंसा हुआ है।

सिंचाई विभाग से अभी 177 हेक्टेअर भूमि चाहिए है। कानूनी पेंच आ रहा है। सिंचाई विभाग से 177 हेक्टेअर भूमि मांगी जा रही है।

गौतम सिंह, प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी ललितपुर।



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