MP Election: Neemuch remained a strong fort of BJP, won five times and Khuman Singh Shivaji lost four times.

MP Election 2023
– फोटो : अमर उजाला, इंदौर

विस्तार


राजस्थान की सीमा से लगा नीमच जिला मंदसौर को विभाजित कर बनाया गया था। यह जुलाई 1998 में अस्तित्व में आया था। अफीम की खेती के लिए पहचाना जाने वाला नीमच जिला अलग ही पहचान रखता है। नीमच विधानसभा सीट 1951-52 से अस्तित्व में है। आरंभ में यहां से कांग्रेस विजयी होती रही, लेकिन बाद में यह क्षेत्र जनसंघ और फिर भाजपा का गढ़ हो गया।

मंत्री रहे थे सीताराम जाजू

1952 में हुए पहले चुनाव में प्रसिद्ध कांग्रेसी नेता और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सीताराम जाजू, जो मध्य भारत में और फिर मध्य प्रदेश में मंत्री रहे थे, वे लगातार दो बार नीमच से चुने गए। उन्होंने उन्होंने रामराज्य परिषद् के खुमानसिंह रघुनाथ सिंह को पराजित किया था। 1957 में सीताराम जाजू पुनः विजय रहे थे। तब मुकाबला त्रिकोणीय हो गया था। निर्दलीय कन्हैयालाल से सीताराम जाजू का मुकाबला हुआ और जनसंघ के उम्मीदवार खुमानसिंह तीसरे स्थान पर रहे। यह एक संयोग रहा था कि दूसरे नंबर पर निर्दलीय कन्हैयालाल रहे थे उन्हें 5782 और भारतीय जनसंघ के खुमानसिंह को 4782 मत प्राप्त हुए थे, यह अंकों का एक अजीब योग रहा था।

खुमानसिंह ने जाजू को हराया था

खुमानसिंह भारतीय जनसंघ के क्षेत्र के कद्दावर और जमीनी नेता थे। 1962 और 1967 में खुमानसिंह ने सीताराम जाजू का चुनाव हराया था। खुमानसिंह प्रखर, तेजतर्रार वक्ता थे उनकी भाषण शैली बहुत ही निराली थी, अटल बिहारी वाजपेयी भी उनकी भाषण शैली से बहुत प्रभावित हुए थे और उन्होंने ही उन्हें शिवाजी उपनाम दिया था।

1972 में कांग्रेस के रघुनंदन प्रसाद विजयी रहे उन्होंने जनसंघ के वकील केशव शंकर लेले को पराजित किया। 1977 में जनता पार्टी के कन्हैयालाल डुंगरवाल ने रघुनंदन प्रसाद को पराजित कर दिया था। इसके बाद 1980 में रघुनंदन प्रसाद से और 1985 में संपत स्वरूप सीताराम जाजू से खुमानसिंह चुनाव हार गए थे इस तरह 1957 के बाद कांग्रेस को लगातार दो बार जीतने का मौका मिला था। 1990 में खुमानसिंह शिवाजी से संपत स्वरुप सीताराम जाजू पराजित हो गए थे। इस पराजय के बाद जाजू परिवार का नीमच क्षेत्र से कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं आया।

1993 में बालकवि बैरागी से 66 मतों से जीते थे खुमान सिंह

नीमच सीट पर 1993 में बड़ा ही रोचक मुकाबला हुआ था। भाजपा से खुमानसिंह और कांग्रेस की ओर से बालकवि बैरागी उम्मीदवार थे। परिणाम आए तो खुमानसिंह 66 मतों से विजयी रहे थे, यह नीमच के विधानसभा चुनाव के इतिहास की सबसे कम मतों से जीत थी। 1998 में कांग्रेस तो 2003 में भाजपा विजयी रही थी। खुमानसिंह शिवाजी ने 2008 में भाजपा से चुनाव लड़ा और कांग्रेस के रघुनाथ सिंह को पराजित किया था। इस तरह खुमानसिंह 5 चुनाव में विजयी रहे तो 4 में उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा था। फरवरी 2013 में खुमानसिंह शिवाजी का निधन हो गया इस तरह वे नीमच के राजनैतिक व चुनावी परिदृश्य में छह दशक तक सक्रिय रहे।

2013 एवं 2018 में भाजपा के दिलीपसिंह परिहार विजयी रहे थे। 2013 के चुनाव में निर्दलीय निरंजन तिवारी राजू ने 13104 मत प्राप्त किए थे, जो 1952 के बाद किसी भी स्वतंत्र उम्मीदवार को प्राप्त मतों से अधिक थे।

इस बार गुर्जर बनाम परिहार में मुकाबला

विधानसभा चुनाव 2023 में तरुण बाहेती को टिकट न देकर कांग्रेस ने उमराव सिंह गुर्जर को उम्मीदवार बनाया है, ताकि जातिगत समीकरण ठीक रहें। वहीं, भाजपा ने विधायक दिलीपसिंह परिहार को फिर टिकट दिया है। 2018 में परिहार ने कांग्रेस उम्मीदवार सत्यनारायण को 14,857 वोटों से हराया था। अब देखना होगा कि क्या कांग्रेस के उमराव सिंह गुर्जर भाजपा के मजबूत किले को भेद पाएंगे? यह तीन दिसंबर को आने वाले नतीजों से ही पता चल सकेगा।

नीमच विस क्षेत्र की रोचक जानकारी

  • कन्हैयालाल डुंगरवाल 1977 में बड़ी विजय के बाद 1985 में जनता पार्टी जेपी से खड़े हुए तो उन्हें मात्र 955 मत ही प्राप्त हो पाए थे।
  • 1952 के बाद 1980 में पहली महिला उम्मीदवार सरस्वती बाई निर्दलीय मैदान में थीं।
  • 2008 में खुमान सिंह नाम से एक निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में था।
  • सर्वाधिक मतदान 2018 में 79.69 प्रतिशत रहा था, वहीं सर्वाधिक उम्मीदवार 2008 में 12 थे।
  • 1952 से 2018 तक नीमच विधानसभा क्षेत्र के 15 चुनावों में 6 कांग्रेस और 9 बार गैर कांग्रेसी (जनसंघ, जनतापार्टी और भाजपा) दल जीते।

नीमच में मतदाता

कुल मतदाता 2 लाख 28 हजार 816
पुरुष 1 लाख 15 हजार 800 
महिला 1 लाख 13 हजार 013
थर्ड जेंडर 3

 



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *