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– मेडिकल कॉलेज में एक हजार गंभीर मरीजों में हुई स्टडी में सामने आए परिणाम

अमर उजाला ब्यूरो

झांसी। बीमारी में बिना जरूरत के एंटीबायोटिक दवाएं खाना मरीजों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज में बुंदेलखंड के एक हजार गंभीर मरीजों पर हुई स्टडी में चौंकाने वाले परिणाम सामने आए हैं। इनमें 60 फीसदी मरीजों में कुछ एंटीबायोटिक दवाएं बेअसर मिलीं। जबकि, 30 फीसदी रोगी ऐसे थे, जिन पर कोई भी एंटीबायोटिक असर नहीं कर रही थी। खांसी, जुकाम, बुखार से लेकर कोई घाव होने पर भी लोग केमिस्ट या फिर झोलाछाप से दवाएं लेकर खा लेते हैं। उन्हें ये मालूम ही नहीं होता कि गैरजरूरी दवा खाने से उसके प्रति शरीर में ड्रग रजिस्टेंस यानी दवा प्रतिरोध उत्पन्न हो जाता है। फिर वो दवा खाने से मर्ज ठीक ही नहीं होता।

मेडिकल कॉलेज के फार्माकोलॉजी विभाग के डॉ. आशीष सारस्वत ने वार्ड और इमरजेंसी में भर्ती ऐसे एक हजार मरीजों पर एंटीबायोटिक दवा के असर पर स्टडी की, जो लंबे इलाज के बावजूद ठीक नहीं हो रहे थे। मेडिकल कॉलेज में भर्ती ऐसे रोगियों की खून, यूरिन, पस आदि की जांच कराई गई। उन्होंने बताया कि स्टडी में 600 रोगियों में कोई एक या दो एंटीबायोटिक के प्रति दवा प्रतिरोध पाया गया। ये दवा देने पर मरीज की सेहत में कोई सुधार नहीं होगा। इसमें 300 मरीजों में सभी एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोध मिला। यानी कि इन पर किसी भी एंटीबायोटिक दवा का असर नहीं हो रहा था।

उन्होंने बताया कि सुपरबग जैसे बैक्टीरिया जब किसी व्यक्ति में संक्रमण कर देते हैं तो दवा का असर खत्म हो जाने से मरीज को ठीक करना बहुत मुश्किल हो जाता है। सेप्टीसीमिया (इस संक्रमण से फेफड़े, लिवर, किडनी अचानक खराब होने लगते हैं) होने से मरीज की जान जा सकती है।

मरीज की कल्चर जांच कराना है जरूरी

डॉ. आशीष के मुताबिक दवा देने से पहले मरीज की संक्रामक बीमारी की कल्चर जांच करानी चाहिए। इससे जिस बैक्टीरिया के कारण बीमारी होती है, उसका पता चलता है। फिर कौन सी एंटीबायोटिक दवा मरीज को देनी है, उसकी जानकारी हो जाती है। अगर एंटीबायोटिक असर न करे तो एंटीबायोटिक संवेदनशीलता की जांच भी करानी चाहिए। कहा कि मेडिकल कॉलेज समेत सरकारी अस्पतालों में गाइडलाइन के अनुसार ही एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं।

दवा के प्रति अवरोध होने के कारण

– मरीज को बिना जांच अथवा कल्चर कराए दवाएं देना।

– झोलाछाप द्वारा बिना जरूरत के भी दवा खिलाना।

– एंटीबायोटिक देने के पहले गाइडलाइन का पालन न करना।



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