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Indore's land is clean, but the sky remains polluted, PH-10 level more than 90

प्रदूूषण रोकने वाले हरियाली ग्रीन बेल्ट से गायब
– फोटो : amar ujala digital

विस्तार

इंदौर की हवा को साफ रखने के तीन साल में 193 करोड़ कर चुके है, लेकिन बदलाव ऊंट के मुंह में जीरे के समान हुए,जो वायु प्रदूषण रोकने की कवायद पर सवाल खड़े कर रहे है। इस साल शहर का पीए-10 का स्तर 98 है, जो काफी ज्यादा है। इसे 85 से कम होना चाहिए। शहर की प्रदूषित होती हवा को लेकर इंदौर के मेयर ही टिप्पणी कर चुके है कि स्वच्छ शहर में वायु प्रदूषण चांद पर दाग के जैसा है। जिम्मेदार विभाग प्रदूषण रोकने के लिए कोई ठोस उपाय नहीं कर रहे है और न ही जनता जागरुक है। एनजीटी ने 5 साल पहले इंदौर की वायु गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए एक्शन प्लान बनाया था। एनजीटी ने 14 विभागों की ज़िम्मेदारी तय की थी, लेकिन सभी ने कागजों पर प्लान बनाए, धरातल पर उतरते तो शहर की हवा भी ताजा रहती।

ये है प्रदूषण की वजह

-शहर की आबादी 40 लाख है और 18 लाख से ज्यादा वाहन है। यह अनुपात देश में सबसे ज्यादा है। 15 साल पुराने वाहनों को हटाने का नियम यहां सख्त नहीं है। कई पुराने वाहन धुआं उड़ाते हुए सड़कों पर दौड़ रहे है।

– शहर में कई जगह सड़कों का निर्माण, मेट्रो प्रोजेक्ट व निजी निर्माण हो रहे है। ये निर्माण शेड या नेट को कवर कर नहीं किए जाते है। इस कारण धूल उडती है अौर हवा को प्रदूषित करती है। सभी सड़कों की स्वीपिंग मशीन से सफाई नहीं हो रही है।

– सड़कों की चौड़ाई ज्यादा नहीं है,जबकि वाहनों की संख्या ज्यादा। वाहनों का प्रदूषण ज्यादा फैलता है। ग्रीन बेल्ट के पेड़ भी ब्रिजों के निर्माण पर काटे जा रहे है। ये पेड़ भी धूल को हवा में जाने से रोकने के लिए मददगार होते है।

– नगर निगम में एक हजार से ज्यादा डीजल वाहन डोर टू डोर कलेक्शन करते है। उनकी स्पीड कम होती है। वे भी प्रदूषण फैलाते है।

– शहर और  आसपास के क्षेत्रों में टायर मोल्डिंग के कारखाने है। रेस्त्रां,होटल में अभी भी तंदूर पर रोटियां बनती है। चौराहों पर वाहनों के इंजन बंद करने का अभियान शिथिल पड़ा है।

-मार्च अप्रैल मेें किसान खेतों में पराली जलाते हैै। अासपास के जंगलों में भी अाग लग जाती है। पराली जलाने वालों के खिलाफ जुर्माना नहीं होता।

 

इंदौर मेंं रह है पीएम-10 स्थिति

वर्ष पीएम-10 (माइक्रोग्राम / एम-3)

2017-18 112

2020-21 92

2021-22 111

2022-23 98

जागरुकता बढ़ाना जरुरी है।

पर्यावरणविद व पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. दिलीप वागेला के अनुसार 2021 में लॉकडाउन के कारण वायु प्रदूषण 2021-22 की तुलना में कम रहा था। इस साल सुधार की मुख्य वजह प्रदूषण कम करने हेतु योजनाबद्ध कार्य, सफाई और उद्योगों के प्रदूषण को कम करने के अलावा मौसम की अनुकूलता भी है। प्रदूषण को लेकर प्रशासन के प्रयासों के अलावा विभिन्न स्वयं सेवी संस्थाओं और नागरिकों में भी जागरुकता बढ़ाने की जरुरत है।



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