
पर्वतारोही मेघा परमार
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माउंट एवरेस्ट की चोटी का फतह करने वाली पर्वतारोही मेघा परमार को प्रदेश के महिला एवं बाल विकास विभाग ने ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान के ब्रांड एंबेसडर पद से हटा दिया है। इस पर मेघा ने कहा कि मैं एक राजनीतिक पार्टी ज्वाइन करने पर राष्ट्रद्रोही हो गई
पर्वतारोही मेघा परमार ने गुरुवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस वार्ता में यह बात कही। उन्होंने कहा, ‘मैं किसान की बेटी हूं, मप्र की बेटी हूं। मैं सपने में भी नहीं सोच सकती थी कि कभी संसार की सबसे ऊंची एवरेस्ट की चोटी को फतह कर पाऊंगी। लेकिन कमलनाथ जी ने मेरी मदद की, मुझे आर्थिक सहायता भी दी और परिणाम आपके सामने हैं। मैं विश्व की सबसे ऊंची चोटी फतह कर पाई।’ मेघा ने कहा कि कमलनाथ ने फिल्मी अभिनेत्रियों की जगह मुझ जैसी एक किसान की बेटी को उक्त अभियान की ब्रांड एंबेसडर बनाया, लेकिन नारी सम्मान की बड़ी-बड़ी बातें करने वाली भाजपा सरकार ने उसी किसान की बेटी को ब्रांड एंबेसडर पद से हटा दिया।
दो दिन पहले तक राष्ट्रभक्त थी
मेघा परमार ने कहा कि मेरा शिवराज सरकार से सवाल है कि पर्वतारोही होने के नाते दो दिन पहले तक मैं राष्ट्रभक्त व प्रदेश का गौरव थी। कल अचानक प्रदेशद्रोही कैसे हो गई? क्यों बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ भाजपा की निगाह में अब बेटी हटाओ नारा बन गया? क्या एक पर्वतारोही के रूप में देश का सम्मान बढ़ाकर गुनाह किया या फिर देश को आजादी दिलाने वाली पार्टी में प्रवेश करने के बाद क्या, मैं राष्ट्रद्रोही हो गई हूं? उन्होंने कहा कि शिवराज सरकार ने इस कृत्य से मेरा ही नहीं, समूची नारी शक्ति का अपमान किया है, बल्कि प्रदेश में राजनैतिक फसल काटने के लिए जो लाड़ली लक्ष्मी योजना, कन्यादान योजना व महिला सशक्तिकरण को लेकर जो सियासी दावे किए जा रहे हैं, उसकी पोल स्वतः ही खुल गई है। भाजपा के महिला सशक्तिकरण का सियासी नारा इस घटना के बाद स्वतः जमींदोज हो गया है।
रत्नेश पांडे को कब हटाएंगे?
मेघा परमार ने कहा कि वह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से प्रति प्रश्न करना चाहती हैं कि सतना के रत्नेश पांडे, जिन्हें शिवराज सरकार ने सतना स्मार्ट सिटी का ब्रांड एम्बेसेडर नियुक्त किया है, वे भाजपा से संबद्ध है, उन्हें कब हटाया जाएगा? क्या राजनैतिक आधार पर महात्मा गांधी का राष्ट्रपिता, रामधारी सिंह दिनकर, मैथिलीशरण गुप्त और पंडित माखनलाल चतुर्वेदी के राष्ट्रकवि होने का दर्जा भी इसलिए समाप्त होगा कि वे कांग्रेस की विचारधारा के थे और ये कविगण कांग्रेस की ओर से संसद सदस्य भी थे?