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उरई। प्रदेश सरकार भले ही स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने का दावा कर रही हो, लेकिन बीहड़ में आज भी अस्पतालों में जिंदगी बचाने के संसाधन नाकाफी हैं। कहीं मशीनों और दवाओं की कमी तो कहीं डॉक्टरों का टोटा है। ऐसे में अक्सर जिंदगी की ख्वाहिश लेकर अस्पताल आने वाले मौत को गले लगाकर लौटते हैं। सोमवार रात भी जिले के दो सरकारी अस्पतालों (सीएचसी) में कुछ ऐसा ही मंजर दिखाई दिया। लोग अपने कलेजे के टुकड़ों को लेकर इलाज के लिए पहुंचे और उनके शव लेकर लौटे। पूरी रात दोनों अस्पताल परिजनों की चीखों से गूंजते रहे।

माधौगढ़। बुखार से पीड़ित डेढ़ माह की बच्ची को परिजनों ने सीएचसी में भर्ती कराया। जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों ने हंगामा काटते हुए अस्पताल प्रबंधन पर हीलाहवाली का आरोप लगाया। कहना है कि डॉक्टर ने बच्ची के मुंह से ऑक्सीजन हटा ली थी, जिससे उसकी मौत हो गई।

कोतवाली क्षेत्र के रामहेतपुरा गांव निवासी गौरव याज्ञिक की पत्नी रीता ने बीती दो अप्रैल को पुत्री मान्या को जन्म दिया था। दो दिनों से बुखार आने पर परिजनों ने उसे सोमवार को सीएचसी में भर्ती कराया। जहां उसकी मौत हो गई। इस पर परिजनों ने सीएचसी में हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि बच्ची को समुचित इलाज न मिलने से उसकी मौत हुई है। मृतक बच्ची के बाबा आनंद कुमार, दादी अर्चना व पिता गौरव का कहना है कि बच्ची का जन्म के दौरान तीन किलो वजन था, जन्म के 15 दिन पहले बुखार आने पर वह बच्ची को नेहरू क्लीनिक एट ले गए।

जहां डॉक्टर ने उसको पेट में साधारण संक्रमण होना बताया था। इसके बाद वह स्वस्थ हो गई थी। सोमवार को फिर उसे बुखार आने पर परिजन जब उसे सीएचसी ले गए। आरोप है कि अस्पताल में तैनात डॉक्टर ने हीलाहवाली करते हुए कहने के बाद ऑक्सीजन लगाई और रेफर होते ही उसकी ऑक्सीजन हटा ली, जिससे उसकी मौत हो गई। इसके बाद डॉक्टर ने मृत बच्ची को ऑक्सीजन लगानी चाही तो परिजनों ने ऑक्सीजन हटा दी।

उन्होंने कहा कि अगर प्रबंधन चाहता तो एंबुलेंस की व्यवस्था करके बच्ची की जान बचा सकता था, लेकिन अस्पताल परिसर में एंबुलेंस होने के बाद भी उसे एंबुलेंस नहीं दी गई। जिससे उनकी बच्ची की मौत हो गई। सीएचसी प्रभारी डॉ. कुलदीप सिंह राजपूत का कहना है कि बच्ची को गंभीर हालत में सीएचसी लाया गया था। परिजनों के आरोप बेबुनियाद हैं।

रामपुरा। सीएचसी रामपुरा में भी एक छह साल की बच्ची की मौत हो गई। परिजनों ने डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है। बच्ची पंखा गिरने से घायल हो गई थी।

क्षेत्र के मुहब्बतपुरा गांव निवासी रवि कुमार की छह साल की बेटी छाया की सोमवार की रात अस्पताल में मौत हो गई। बच्ची के पिता रवि और ग्रामीणों ने अस्पताल स्टॉफ पर आरोप लगाया कि रात के समय जब वह अपनी बच्ची को रामपुरा अस्पताल लेकर गया तो आधा घंटे तक किसी भी डॉक्टर ने बेटी का इलाज नहीं किया।

अस्पताल में मौजूद फार्मासिस्ट ने बच्ची को इंजेक्शन लगा दिया। जब आधा घंटे बाद डॉक्टर आए तो उन्होंने बताया कि बच्ची मृत हो गई हैं। पिता का आरोप है कि जब वह अस्पताल में दाखिल हो रहे थे तो डॉक्टर घायल छाया के पास से गुजर गए लेकिन उन्होंने एक बार भी उसे देखना मुनासिब नहीं समझा। समय रहते बच्ची को उपचार उपलब्ध हो जाता तो शायद उस मासूम की जान बचाई जा सकी थी।

उन्होंने कहा कि अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगाला जाए तो डॉक्टरों की लापरवाही उजागर हो जाएगी। चिकित्सा अधीक्षक डॉ विनय पांडेय का कहना है कि बीती रात इलाज के लिए आई बच्ची गंभीर हालात में उपचार के लिए अस्पताल लाई गई थी। जिसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। मृतक बच्ची के पिता व ग्रामीणों द्वारा अस्पताल स्टाफ पर गलत आरोप लगाए जा रहे हैं।

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