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Even after five days the cages of the dogs are empty

कुत्ता
– फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

अलीगढ़ शहर में एक बुजुर्ग और एक बच्ची को खूंखार कुत्तों को अपना शिकार बना लेने की हुई इन दोनों घटनाओं ने शहरवासियों को चिंता में डाल दिया है। नगर निगम के अफसर भले ही इन खूंखार हो रहे कुत्तों को एक एनजीओ के माध्यम से पकड़ने एवं एक मई से नसबंदी कराने के दावों की पोल खुल रही है। पांच दिन बाद भी नगर निगम आश्रय स्थल को शुरू नहीं कर सका है। 

पहली घटना के 20 दिन बाद भी नगर निगम की टीमें एक भी खूंखार कुत्ते को नहीं पकड़ सकी हैं। इन्हें पकड़ने के लिए बनाया गया क्वार्सी बाईपास पर बनाए गए आश्रय स्थल और पिंजरे खाली पड़े हुए हैं। नगर निगम ने कुत्तों को पकड़ने और उनकी नसबंदी करा कर उन्हें आश्रय स्थल में पहुंचाने का जिम्मा एक एनजीओ को सौंपा है। 

16 अप्रैल को एएमयू में सैर को निकले एक सेवानिवृत्त चिकित्सक पर खूंखार कुत्तों ने हमला बोलकर उन्हें मार डाला था। इस घटना के ठीक एक सप्ताह बाद ही शहर की पॉश कॉलोनी स्वर्ण जयंती नगर में चार माह की बच्ची को कुत्ता घर से खींचकर झाड़ियों में ले गया और नोंच-नोंचकर बच्ची को मार डाला। इन दोनों घटनाओं के बाद भी नगर निगम के अफसर शहरवासियों को कुत्तों के आतंक से निजात दिलाने में विफल साबित हुए हैं। 

नगर निगम के अपर नगर आयुक्त राकेश यादव ने बताया कि शहर में अभियान चलाकर खूंखार कुत्तों को पकड़कर उनकी नसबंदी करायी जाएगी। इसके लिए एनबीटी अस्पताल के पास कुत्ता आश्रय स्थल भी बनाया गया है। कुत्तों को पकड़ने और उनकी नसबंदी कराने का जिम्मा एक एनजीओ को सौंपा गया है। अगले एक-दो दिन में कुत्तों की नसबंदी और उन्हें आश्रय स्थल में भेजने की कार्रवाई शुरू हो जाएगी।



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