नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने आधार को लेकर दिया बड़ा फैसला

नई दिल्ली। केंद्र के महत्वपूर्ण आधार कार्यक्रम और इससे जुड़े 2016 के कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली कुछ याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने 26 सितंबर को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने माना की आधार आम आदमी की पहचान है। कोर्ट ने कहा कि सीबीएसई, एनईईटी में आधार जरूरी नहीं है। इसके आलावा स्कूल में एडमिशन के लिए भी आधार कार्ड जरूरी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आधार बैंक अकाउंट से लिंक नहीं होगा। साथ ही मोबाइल से आधार को लिंक करना जरूरी नहीं है। उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि 99.76 फीसदी लोगों को सुविधा से वंचित नहीं किया जा सकता है। जस्टिस एके सीकरी ने कहा कि आधार समाज के हाशिए वाले वर्ग को ताकत प्रदान करता है और उन्हें एक पहचान देता है, आधार अन्य आईडी प्रमाणों से भी अलग है क्योंकि इसमें जालसाजी नहीं की जा सकती है। जानिए आधार नंबर का अब तक का सफर.. 200910 में शुरू हुई योजना आयोग ने 28 जनवरी 2009 को यूआईडीएआई की अधिसूचना जारी की। सितंबर 2010 में इस कार्यक्रम को ग्रामीण महाराष्ट्र से शुरू किया गया। नेशनल आईडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया बिल 2010 में इसे पेश किया गया। बाद में स्टैंडिंग कमेटी को इसे भेजा गया, जिसने निजता, संवेदनशील सूचना आदि मुद्दों पर उठाया। 201213 में कोर्ट ने दिया नोटिस आधार नंबर को लेकर दायर की गई कई जनहित याचिकाओं के बाद 30 नवंबर 2012 को सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार नोटिस जारी किया। बताते चलें कि सेवानिवृत्त न्यायाधीश केपी पुत्तास्वामी प्रमुख याचिकाकर्ता थे। इस मामले में 23 सितंबर 2013 को दो जजों की बेंच ने सारे मामलों की सुनवाई के आदेश दिए। 26 नवंबर 2013 को बेंच ने आदेश दिया कि सभी राज्यों और संघ शासित प्रदेश उत्तरदायी होंगे। 2016 में बिल पारित आधार बिल 2016 (वित्तीय और अन्य सब्सिडी, लाभ और सेवाओं का लक्षित वितरण) को 3 मार्च 2016 को लोकसभा में पेश किया गया। इसे बाद में मनी बिल के रूप में पारित किया गया। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने 10 मई को सुप्रीम कोर्ट में लोक सभा की तरफ से इसे मनी बिल के रूप में पारित करने को चुनौत दी। इसके बाद 21 अक्टूबर को आधार की वैधता को लेकर एसजी वोम्बाटककेर बनाम भारत सरकार मामला हुआ। आधार लिंक नियम, 2017 सरकार ने आयकर अधिनियम की धारा 139एए पेश किया। इसके तहत पैन के आवेदन करने और रिटर्न दाखिल करने के लिए आधार को अनिवार्य कर दिया गया। सरकार ने एक जून को 50,000 रुपए या उससे अधिक के लेन-देन, बैंक खाते खोलने और उन्हें मेंटेन करने के लिए आधार को अनिवार्य कर दिया गया। दो जजों की बेंच ने 9 जून 2017 को आईटी अधिनियम धारा 13 9एए को बरकरार रखा। हालांकि, जिन लोगों के पास आधार कार्ड नहीं थे, उनके पैन कार्ड को कुछ समय के लिए अमान्य माना नहीं किया। निजता को लेकर केस आधार कार्ड की निजता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मामला उठाया गया। इस पर 24 अगस्त 2017 को नौ जजों की बेंच ने फैसला दिया कि गोपनीयता का अधिकार एक मौलिक अधिकार है। 17 जनवरी 2018 को पांच जजों की बेंच ने आधार मामले की सुनवाई शुरू की और 10 मई को सुनवाई पूरी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

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