दिल्ली नई दिल्ली

मसूद अजहर को यदि संयुक्त राष्ट्र ने वैश्विक आतंकी घोषित किया, तो जानिए क्या होगा

नई दिल्ली। अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने बुधवार को संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में जैश-ए-मोहम्‍मद के सरगना मसूद अजहर को ग्लोबल टैरेरिस्ट घोषित करने के लिए प्रस्ताव पेश किया है। यदि ऐसा होता है तो मसूद अजहर के वैश्विक यात्रा प्रतिबंध लगाने, उसकी संपत्तियों को जब्‍त करने और हथियार बैन लगाया जा सकेगा। इस प्रस्‍ताव में कहा गया है कि जैश ने ही भारतीय अर्द्धसैनिक बल सीआरपीएफ के काफिले पर हमला किया था। एक सिक्योरिटी काउंसिल किसी व्यक्ति या संस्था का नाम आतंकी के रूप में घोषित कर देती है, तो यूएन के सभी सदस्य देशों में भी वह आतंकी घोषित हो जाता है। इसके साथ ही उस व्यक्ति या संस्था को कई तरह के प्रतिबंधों का सामना करना होता है। इसके तहत उस व्यक्ति पर वित्तीय प्रतिबंध लगाए जाते हैं, उसकी यात्रा को रोक दिया जाता है और उसके हथियारों को रखने पर रोक लगा दी जाती है। वित्तीय प्रतिबंधों के तहत आतंकी घोषित किए जाने के बाद यूएन के सदस्य देश उस व्यक्ति या संस्था के फंड्स, वित्तीय सहायताएं, आर्थिक स्रोतों को फ्रीज कर देते हैं। उस व्यक्ति या संस्था की तरफ से काम करने वाले लोगों या संस्थाओं की फंड्स और आर्थिक स्रोतों को भी फ्रीज कर दिया जाता है। वहीं यात्रा पर प्रतिबंध के तहत सदस्य देश अपनी सीमा में उस व्यक्ति को आने या जाने नहीं देती है।

10 दिनों में पास करना होगा प्रस्ताव

पंद्रह सदस्यीय सुरक्षा परिषद में वीटो के अधिकार वाले तीन देशों ने बुधवार को यह नया प्रस्ताव पेश किया। तीन देशों की ओर से पेश इस नए प्रस्ताव पर सुरक्षा परिषद प्रतिबंध समिति को 10 कामकाजी दिन में विचार करना होगा। मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित कराने के लिए पिछले 10 वर्षों में संयुक्त राष्ट्र में यह चौथा ऐसा प्रयास है। बताते चलें कि भारत ने 2009 में मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने संबंधी प्रस्ताव पेश किया था। इसके बाद 2016 में भारत ने इस संबंध में पी3 देशों यानी अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस के साथ मिल कर संयुक्त राष्ट्र की 1267 सदस्यीय प्रतिबंध समिति के समक्ष मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने संबंधी प्रस्ताव पेश किया था। इसके बाद 2017 में भारत ने पी3 देशों के साथ इसी प्रकार का प्रस्ताव फिर से पेश किया था।

चीन ने हर बार किया वीटो

मगर, सभी मौकों पर वीटो का अधिकार रखने वाले सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्य चीन ने अपने अधिकार का इस्तेमाल करके इस प्रस्ताव को पारित होने से रोक दिया। दरअसल, चीन पाकिस्तान का बेहद करीबी है और वह पहले भारत फिर अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस के प्रस्ताव पर तकनीकी रोड़े अटका चुका है। सब की निगाहें अब इस ओर लगी हैं कि इस प्रस्ताव पर चीन इस बार क्या रुख अपनाता है।

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