उत्तर प्रदेश जालौन

पानी परात को हाथ छुओ नहि नैनन के जल सो पग धोये: जगदीश महाराज

कोंच/जालौन। जितेंद्र कुशवाहा। नदीगाव विकासखण्ड के ग्राम महातवानी मे प्रमोद सिहं चौहान के आवास पर चल रही श्रीमद भागवत कथा का श्रद्धालुजनो को अमृतपान कराते हुये कथा वाचक पं जगदीश नारायण महाराज ने कहा मित्रता हो तो श्रीकृष्ण और सुदामा जैसी हो जो जीवन पर्यन्त निभायी जा सके श्रीकृष्ण और सुदामा अपने गुरू संदीपन के आश्रम मे साथ साथ पढते थे साथ साथ सभी काम करते थे कोई भेदभाव नही था पढाई पूरी करने के वाद एक राजा बनता है और एक गरीबी भोगता है पर मित्रता मे कोई अन्तर नही आता है जब एक मित्र दूसरे मित्र के पास जाता है अपने मित्र सुदामा का आगमन जैसे ही द्वारपालो द्वारा सुनते है तो मित्र श्रीकृष्ण यानि द्वारिकाधीश नंगे पैरो ही मित्र को लेने दौड पडते है इतना ही नही अपने मित्र की हालत देख इतने द्रवित हो जाते है कि पैर धोने के लिये परात मे पानी तो मंगाते पर उस पानी की जरूरत ही नही पडती पानी परात को हाथ छुओ नही नैनन के जल सो पग धोये अपने आँसुओ से ही पैर धो डाले ! श्रीकृष्ण ने अपने जीवन से बताया है कि मित्र भाव क्या होता है

इस कथा के दौरान पारीक्षत के रूप मे रहे प्रमोद सिंह चौहान व संतोष कुमारी चौहान अन्य श्रद्धालुओं मे देवप्रसाद शिवहरे मानवेंद्र सिंह चौहान (पंजाब नैशनल बैक झांसी ) आनंद सिंह चौहान( एयर फ़ोर्स )समरथ सिहं चौहान विनोद सिंह चौहान डा रामसनेही गुप्ता शम्भूदयाल राधेश्याम मंगल सिंह चौहान शंकर सिंह नत्थू सिहं भदौरिया बडे भाई आदि।

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