भोपाल मध्यप्रदेश

संकट मोचन के खिलाफ हुए शिव

भोपाल। मध्यप्रदेश में भाजपा की राजनीति अब आपसी उठापटक के चरमोत्कर्ष पर है। पूर्व मुख्यमंत्री की अतिमहत्वाकांक्षा के चलते उनके ही खास रहे, उनके संकटमोचक डॉ. नरोत्तम मिश्रा उनके नये शिकार हो गये। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उनको तब निपटा दिया, जब डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम लगभग नेता प्रतिपक्ष के रूप में दिल्ली हाईकमान से तय हो गया था। पूर्व मुख्यमंत्री ने इस मामले में अपने ही खास डॉ. मिश्रा को नेता प्रतिपक्ष बनने से रोकने के लिए हर हथकंडे अपनाये, वह कोप भवन में भी चले गये और अपने चंद सलाहकारों से मिलकर लामबंदी भी की। जबकि डॉ. मिश्रा ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का साथ पिछले 13 सालों से ऐसे समय दिया जब उनके खिलाफ लगातार मोर्चाबंदी चल रही थी, उन पर डंपर, व्यापमं जैसे मामलों की तलवार लटक रही थी। कम से कम डॉ. मिश्रा के साथ इस प्रकार का उनका एकाएक पलटवार समझ से परे रहा। पूर्व मुख्यमंत्री के शिकार हुये डॉ. मिश्रा ने हालांकि इस दंश को झेल लिया है, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या भाजपा में अपने ही विश्वसनीय ढाल बनकर खड़े साथियों का निपटाने की परंपरा चल रही है। पूर्व में मध्यप्रदेश में ऐसे उदाहरणों के शिकार उमा भारती से लेकर बाबूलाल गौर, कैलाश विजयवर्गीय, प्रभात झा, प्रहलाद पटेल, राघवजी भाई, लक्ष्मीकांत शर्मा, नंदकुमार सिंह चौहान, भूपेन्द्र सिंह, अजय विश्नोई, सरताज सिंह, रघुनंदन शर्मा भी हो चुके हैं। अब उनकी निगाह भाजपा के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष पर भी हैं, वह उनको भी अब पसंद नहीं कर रहे हैं। राजनैतिक सूत्रों का कहना हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी राजनैतिक महत्वाकांक्षा के चलते अब किसी को भी अपने से ज्यादा आगे नहीं आने देना चाहते हैं कि कहीं वह आगे समय में उनकी ही कुर्सी का दावेदार न हो जाये। सब जानते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री चौहान मध्यप्रदेश में अपना एकतरफा राज चलाने के लिए पार्टी नेताओं से ज्यादा चंद आईएएस पर विश्वास करते रहे। बस यहीं कारण था कि इस बार उन्हें उनके खास आईएएस सलाहकार ही ले डूबे। अब प्रदेश में हुआ सारा घटनाक्रम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व पार्टी अध्यक्ष अमित शाह तक जा पहुंचा हैं।

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