भोपाल मध्यप्रदेश

कांग्रेस के अखबार के मुताबिक मप्र में जीतेगी भाजपा

भोपाल। (देवानंद नायक) वैसे तो हर राजनीतिक दल जो चुनावी अखाड़े में उतर रहा हो अपनी शत प्रतिशत जीत का दावा करता ही है किंतु यह दावा अगर उसके धुर विरोधी राजनीतिक दल का मुखपत्र माना जाने वाले अखबार करे तो मामला बड़ा दिलचस्प होगा, जी हां मध्य प्रदेश में चौथी बार भी भाजपा की सरकार बनने जा रही है| यह हम नहीं बल्कि एक सर्वे रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भाजपा के लिए कांग्रेस और बसपा का गठबंधन मुसीबत खड़ी कर सकता है, अगर गठबंधन के बिना कांग्रेस चुनाव में जाती है तो भाजपा फिर सरकार बनाने में सफल हो सकती है| यह अनुमान स्पिक मीडिया नेटवर्क के प्री-पोल सर्वे में लगाया गया है| कांग्रेस पार्टी के मुखपत्र माने जाने वाले अख़बार नेशनल हेराल्ड में चुनाव पूर्व सर्वे प्रकशित किया गया है| नेशनल हेरॉल्ड की वेबसाइट में प्रकाशित चुनाव पूर्व सर्वे में बताया गया है कि मध्य प्रदेश में अगर प्रदेश में कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी के बीच गठबंधन नहीं हुआ तो भाजपा को इससे फायदा होगा और चुनाव में बीजेपी के खाते में 147 सीट आएंगी| वहीं कांग्रेस सिर्फ 73 सीटें ही जीत पायेगी और बसपा के पास दस सीटें जाएंगी| वहीं अगर कांग्रेस और बसपा गठबंधन होता है तो 230 सीटों में से 126 सीटें भाजपा को मिलेंगी और कांग्रेस-बीएसपी गठबंधन 103 सीट ही हासिल कर पाएगा| दोनों स्तिथि में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलता दिख रहा है, क्यूंकि प्रदेश में बहुमत का आंकड़ा छूने के लिए 115 सीटें चाहिए| सर्वे ये भी कहता है कि मध्यप्रदेश में सीएम शिवराज सिंह और पीएम मोदी की लोकप्रियता बरकरार है|

मोदी लहर बरकरार

सर्वे में यह भी बताया गया है कि फिलहाल मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रभाव अब भी जारी है। यदि भाजपा मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव में ही जोरदार प्रचार अभियान करती है तो उसे लोकसभा में ज्यादा मेहनत नहीं करना पड़ेगी। लेकिन, भाजपा यदि विपक्ष में आ गई तो लोकसभा में उसे भाजपा को वापस लाना मुश्किल हो जाएगा।

कांग्रेस-बसपा गठबंधन में सीटों पर पेंच

नेशनल हेरॉल्ड में छपा सर्वे इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ये कांग्रेस विचारधारा समर्थित अख़बार हैऔर इसे कांग्रेस का मुखपत्र माना जाता रहा है, हालाँकि सर्वे रिपोर्ट सामने आने के बाद कांग्रेस अभी इससे इंकार कर रही है| साल की शुरुआत से ही कांग्रेस और बसपा के गठबंधन की अटकलें चल रही है, इस पर राहुल गाँधी भी मुहर लगा चुके हैं। लेकिन मायावती ने साफ कर दिया था कि हम अकेले चुनाव लड़ने को तैयार हैं, यदि मध्यप्रदेश में सम्मानजनक सीटें मिलेंगी तो हम गठबंधन को तैयार हैं। मायावती के बयान के बाद प्रदेश में कांग्रेस और बसपा के साथ आने पर संशय बना हुआ है, सीटों के बंटवारे पर अभी पेंच अड़ा हुआ है| वहीं इस सर्वे रिपोर्ट से कांग्रेस की नींद उड़ गई है, वही भाजपा खेमे में ख़ुशी है, हालांकि भाजपा नेता पहले से ही सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं| वहीं कांग्रेस ने इस सर्वे से खुद को अलग कर लिया है| कांग्रेस की प्रवक्ता शोभा ओझा ने कहा है कि नेशनल हेराल्ड से कांग्रेस का कोई लेना-देना नहीं है।

चुनावी तैयारियों में भी पिछड़ी कांग्रेस

साल के अंत में होने वाले चुनाव की तैयारियों में दोनों ही पार्टियां लगी हुई हैं, लेकिन सत्ता वापसी के हिसाब से कांग्रेस की तैयारियों में अभी उतनी तेजी नहीं आई है| एक तरफ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जनता का आशीर्वाद लेने निकल पड़े हैं और चुनाव तक उनके कार्यक्रम तय हो चुके हैं, भाजपा अब जनता के बीच पूरी तरह पहुँचने की तैयारी में है, वहीं कांग्रेस में अभी आपसी मतभेद ख़त्म करने और कार्यकर्ताओं को ही मानाने की दिशा में काम किया जा रहा है| जिसके चलते पार्टी हाईकमान भी चिंतित है और राहुल गाँधी ने दिल्ली में पीसीसी चीफ कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया, दीपक बावरिया सहित तमाम नेताओं की बैठक बुलाई है|

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